Tuesday, December 8, 2009

तीसरा शेर



सपनो की दुनिया आइना,

बनकर टूट गयी ....

हर एक खवाब हकीकत से ,

रूठ गयी ...

आँखों की नमी ने जब गाल ,
छुआ तो एहसास हुआ....

के ज़िन्दगी हाथों से ,
छुट गयी .....

Monday, December 7, 2009

शेर


दिल को अपने लुटा के बैठा हूँ ,
गम को अपना बना के बैठा हूँ ,

क्या खबर मुस्कुराने वालो को,
ज़ख्म क्या क्या छुपा के बैठा हूँ ..........

Sunday, December 6, 2009

बेईमानी

5,December,
1:53am

मैंने आज अखबार ये लेख पढ़ा अब आपके सामने रख रहा हूँ , मेरे मन में इस बात को लेकर काफी सवाल है ...मैं आप सबसे जानना चाहते हो कि आप इन सभी बातों से कितना सहमत हैं

इस बात को भी थोडा समझ लेना जरूरी है .
अगर गरीब आदमी बेईमान होता तो वह भी शायद अमीर हो गया होता . लेकिन अगर वह अमीर नहीं होसकता है ,तो इसका मतलब यह नहीं की वह बेईमान नहीं है .इतना ही हो सकता है की उसकी बेईमानी सफल होपाई हो .यह भी हो सकता है की वह बेईमानी उसने की हो ,लेकिन पडोसी उससे ज़यादा बेईमानी कर गया हो . यहभी हो सकता है की बेईमानी वह करना चाहता हो, लेकिन साहस जुटा पता हो . बहुत से अच्छे आदमी सिर्फकमजोर -कमजोरी की वजह से अच्छे मालूम होते है .
अगर हम लोगो के दिलो में उतर सके ,तो हमे बहुत हैरानी होगी .जिनको हम अच्छे आदमी कहते है ,अक्सर वे ऐसेआदमी होते हैं जो बुरा करने में हिम्मत नहीं जुटा पाते .बुरा करने के लिए भी हिम्मत चाहिए ,करेज चाहिए ,डेरिंगचाहिए ,बुरा करने के लिए फसने की तो कम से कम हिम्मत चाहिए ,दाव पर लगने की हिम्मत चाहिए ....
अक्सर इस मुल्क में जिनको हम अच्छा कहते हैं वह कमज़ोर आदमी हैं और जिस मुल्क में कमजोर आदमी अच्छे होते हैं और ताकतवर आदमी बुरे हो जाते हैं ,उसके दुर्भाग्य के सिवाए उस मुल्क में और कुछ भी घटित नहीं होता . आज जो आदमी हिम्मतवाला हैं,वह बुरा हो जाता हैं और जो कमजोर हैं वह अच्छा होजाता हैं . नपुंसक अच्छे आदमियों से कोई समाज नहीं बदल सकता . जब तक हम ताकतवर लोगों को अच्छे होनेकी दिशा में लगाए,तब तक यह नहीं हो सकेगा ....
लेकिन ताकतवर आदमी अच्छे होने की दिशा में क्यों जाए ? क्योकि अच्छे होने की दिशा में सिर्फ असफलता केसिवाए कुछ भी हाथ लगने को हो ,तो अच्छा आदमी फिर सफलता की दिशा में जाना शुरू हो जाता हैं .सरे समाजकी व्यवस्था ऐसी हैं की सफलता एकमात्र आकर्षण हैं . आप भी उसको पूजते हैं ,जो जीत जाता है ....
पुरानी कहावत है सत्य जीतता हैं ,लेकिन उस कहावत में मुझे भ्रान्ति मालूम पड़ती है, मुझे ऐसा लगता हैंकि जो जीत जाता हैं उसी को हम सत्य कहने लगते हैं . हम सफलता को आदर देते हैं , सफलता किसी भांति में जाए . अगर हमे यह स्थिति बदलनी हैं, तो हमे आदर के मूल्य बदलने पड़ेंगे . हम आदर के मूल्य जिन्हें देंगे , समाज उसी तरफ दोड़ना शुरू हो जाता है ....
उदहारण के तौर पर हम हिंदुस्तान में सन्यासी को बहुत आदर दिया तो हिंदुस्तान में लाखो सन्यासी हो गए . किसी दुसरे मुल्क में इतना सन्यासी को आदर नहीं मिला ,इसलिए दुसरे मुल्क में इतने सन्यासी पैदा नहीं हुए . फ़्रांस में लाखों चित्रकार पैदा हो हते हैं , क्योकि वहां चित्रकार को बहुत आदर मिलता है ,.,इतनी चित्रकार दुनिया में और कहीं नहीं होते ,क्योकि इतना आदर उन्हें नहीं मिलता .............ओशो वर्ल्ड

Thursday, December 3, 2009

सवाल

3 December 2009,
10:40pm

मन
में कभी कभी इतना अकेलापन छा जाता है की आप बस चाहते हो की कोई आपसे बात करे , आपके साथ बैठेआप उन्हें अपनी सारी बातें बताओ पर जब हम अपने पास देखते है तो कोई नहीं सिवाए हमारी परछाई के . ऐसाक्यों होता है , हम उसे बार बार फ़ोन करते हैं ,वो फ़ोन नहीं उठाता ,हम किसी और के साथ गम बाटने की कोशिशकरते है पर उसके पास वक़्त नहीं होता . क्यों क्यों.... ऐसा कब तक ,..
कई बार ऐसा लगता हैं की आज ये बात मेरे साथ गलत हुयी , आज ये बात मेरे साथ बहुत अच्छी हुयी ,पर बोलेकिसी ,बताये किसी दूर दूर तक किसी का कन्धा नहीं तुम्हारे लिए .क्या करे ?
तब ..क्या करे .



जब
आपके चिल्लाने का मन कर रहा हो पर आपके आवाज़ कोई सुने ..जब आपका रोने का मन करे पर किसीका हाथ नहीं आपके उन आंसूओं को पूछने के लिए ..क्या करे जब आप किसी के गले लग आपने सारा मन हल्काकरना चाहते हो पर कोई हो ..क्या करे ?
रोज़ जब शाम को आप अपने घर वापस रहे हो तो आपके पास सिवाए अपने से बात करने के अलावा कोई चारा हो ..क्या करे ?
मन तो कर रहा है की आज तो आराम से बैठ कर बात करू ..पर तभी ख्याल आये बात किससे ..
क्या करे ? तन्हाई ,खालीपन , और अकेलेपन से घिर जाये ॥क्या करे ? क्यों आज ऐसा हमे लग रहा है ॥क्या करे ? आज तक तो ऐसा नहीं था ॥तो अब क्यों ॥क्या हमने कुछ गलत कहा ॥किसी को कुछ कहा ..ऐसा भी नहीं नहीं है फिर ये सब क्यों ...क्यों है हम अकेले..अकेले कोई नहीं रहना चाहता ..चाहे कोई एक हो पर हो ..
वो
दोस्त ,वो साथीजिससे हम अपने सारे जज़्बात बात सके .. ऐसे सवाल पता नहीं कितने बार मेरे दिल में उठते है और फिर ये सोचके बैठ जाते है की इस सवाल का जवाब मेरे पास नहीं है ..अगर आपके पास हो तो जरूर बताईगा ...सवाल का जवाब

Tuesday, December 1, 2009

रब्बा जो तेरी

अब सोने जा रहा हूँ कल फ़िर मिलूँगा अभी गाने भी सुनने है और सुबह जल्दी भी उठाना है जाते जाते आपको एक गाने की चंद पंक्तिया लिख कर जा रहा हूँ

माँगा
जो मेरा है
जाता क्या तेरा है ,
मैंने कौन सी तुझसे जन्नत मांग ली
कैसा खुदा है तू
बस नाम का है तू
रब्बा जो तेरी
इतनी सी भी चली
चाहिए जो मुझे
करदे तू मुझको अदा ....
तुने आवाज़ नहीं दी

कभी
, मुड़ कर वर्ना....

तुने
आवाज़ नहीं दी

कभी
,मुड़ कर वर्ना....

हम
कई संदिया

तुझे
घूम के देखा

करते
................

दूसरा शेर

ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं ,कुछ और भी हैं
ज़ुल्फ़ ओं रुखसार की जन्नत नहीं ,कुछ और भी है
भूख और प्यास की मारी हुयी इस दुनिया में
इश्क ही एक हकीकत नहीं ,कुछ और भी है ................


साहिर साहब